Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

मूढ़त्रय मदाश्चाष्टौ, तथानायतनानि षट्। अष्टौ शङ्कादयश्चेति, दृग्दोषाः पञ्चविंशतिः।।

तीन मूढ़ता, आठ मद, छह अनायतन, आठ शङ्कादि दोष ये सम्यग्दर्शन के पच्चीस दोष हैं।

Three follies, eight forms of pride, six wrong shelters, and eight faults beginning with doubt — these are the twenty-five faults of right-faith.

— आराध्य सूत्र · #62

इसी विषय के और सूत्र

सभी विवेक →
प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक