Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

गतानुगतिको लोको, न लोका पारमार्थिकः। बालुका पुञ्जमात्रेण, गतं मे ताम्रभाजनम्।।

संसारी प्राणी देखा-देखी करते हैं, परमार्थ का विचार नहीं करते, नारद जी ने कमण्डल को गुमने के भय से गङ्गा के किनारे रेत से ढक दिया, लोगों ने समझा इससे पुण्य होता होगा इसलिए सबने रेत के ढेर लगा दिए, नारद जी स्नान करके जब बाहर आये तो वहाँ पर रेत के अनेक ढेर बन गये नारद जी ने अपना कमण्डल बहुत खोजा किन्तु कमण्डल ही गुम गया यह लोकमूढ़ता है।

Worldly beings act by imitation, not considering the higher truth. Narada, fearing his water-pot would be lost, covered it with sand on the Ganga's bank; people thought this must earn merit and all heaped up sand. When Narada came out from bathing there were many sand-heaps; he searched hard for his pot but the very pot was lost — this is worldly folly.

— आराध्य सूत्र · #61

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
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