Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

नरत्वेऽपि पशूयन्ते, मिथ्यात्वग्रस्तचेतसा। पशुत्वेऽपि नरायन्ते, सम्यक्त्वव्यक्त चेतना।।

मिथ्यादृष्टि होने से मनुष्य पशु के समान है और सम्यग्दृष्टि होने से पशु मनुष्य के समान है।

Through wrong-belief a human is like a beast, and through right-belief a beast is like a human.

— आराध्य सूत्र · #59

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक