नरत्वेऽपि पशूयन्ते, मिथ्यात्वग्रस्तचेतसा। पशुत्वेऽपि नरायन्ते, सम्यक्त्वव्यक्त चेतना।।
मिथ्यादृष्टि होने से मनुष्य पशु के समान है और सम्यग्दृष्टि होने से पशु मनुष्य के समान है।
Through wrong-belief a human is like a beast, and through right-belief a beast is like a human.
— आराध्य सूत्र · #59
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