Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

हिंसा रहिए धम्मे अट्ठारस दोस वज्जिए देवे। णिग्गंथे पवयणे, सद्दहणे होई सम्मतं।।

हिंसा रहित धर्म, अठारह दोष रहित देव, निर्ग्रन्थ गुरु के श्रद्धान करने से सम्यग्दर्शन होता है।

Right-faith arises from believing in dharma free of violence, in a Deity free of the eighteen faults, and in the possessionless (nirgrantha) Guru.

— आराध्य सूत्र · #58

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक