Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

जैसे मुख में जीभ साथ में आती है और दाँत बाद में, उसी तरह अगृहीत मिथ्यात्व साथ में आता है, गृहीत बाद में आता है, दूध में पानी मिलाना गृहीत है और जो स्वभाव से मिला है वह अगृहीत है।

Just as the tongue comes with birth in the mouth and the teeth come later, so innate wrong-belief comes with us, while acquired wrong-belief comes later; mixing water into milk is 'acquired,' while what comes by nature is 'innate.'

— आराध्य सूत्र · #47

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक