Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

सम्यग्दर्शन शुद्धः, नारक तिर्यङ्नपुंसकस्त्रीत्वानि। दुष्कुल विकृताल्पायु, र्दरिद्रतां च व्रजन्ति नाप्यव्रतिकाः।।

शुद्ध सम्यग्दृष्टि जीव अविरति होने पर भी नरक, तिर्यञ्च, नपुंसक, स्त्री पर्याय, नीचकुल, विकृत अङ्ग, अल्पायु और दरिद्रता को प्राप्त नहीं होता है।

A pure right-believing soul, even while still non-abstinent, does not attain the hellish or animal state, a neuter or female birth, a low family, deformed limbs, short life, or poverty.

— आराध्य सूत्र · #37

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक