Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

मनुष्य सम्यक्त्व के माहात्म्य से तीर्थंङ्कर तथा चक्रवर्ती आदि की विभूति को पाकर अन्त में मोक्ष रूप परमपद को प्राप्त होता है।

By the glory of right-faith a human being, attaining the splendour of a Tirthankara, Chakravarti and the like, at last reaches the supreme state of liberation.

— आराध्य सूत्र · #18

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक