Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

श्रद्धानं परमार्थाना, माप्तागम तपोभृतां। त्रिमूढापोढ़मष्टाङ्गं, सम्यग्दर्शनमस्मयं।

तीन मूढ़ताओं से रहित आठ अङ्गों से सहित सच्चे देव-शास्त्र-गुरु का श्रद्धान करना सम्यग्दर्शन कहलाता है।

Believing in the true Deity, Scripture and Guru, free of the three follies and endowed with the eight limbs, is called right-faith (samyagdarshan).

— आराध्य सूत्र · #8

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक