Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

दर्शन विशुद्धि- प्रारम्भ के चार अङ्ग निःशङ्कित, निःकाङ्क्षित निर्विचिकित्सा और अमूढ़दृष्टि वीतरागता प्रकट करते हैं एवं अन्त के चार अङ्ग उपगूहन, स्थितिकरण, वात्सल्य और प्रभावना सम्यग्दर्शन की विशुद्धि को बढ़ाने वाले हैं।

Purity of faith: the first four limbs — freedom from doubt, freedom from craving, freedom from disgust, and undeluded vision — manifest dispassion; while the last four — concealing others' faults, re-establishing the wavering, affection, and glorification — increase the purity of right-faith.

— आराध्य सूत्र · #3

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक