Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

सम्यक्त्व रत्न के बदले जो विषय सुख की आकाङ्क्षा करता है, वह मनुष्य उस विषयी मनुष्य के तुल्य है जो किसी दासी के साथ सम्भोग करने के बदले में चिन्तामणि रत्न देता है।

One who craves sensual pleasure in exchange for the jewel of right-faith is like the lustful man who gives away a wish-fulfilling Chintamani gem in return for union with a maidservant.

— आराध्य सूत्र · #1

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक