जो जाणदि अरहंतं, दव्वत्तगुणत्त पज्जयत्तेहिं। सो जाणदि अप्पाणं, मोहो खलु जादि तस्स लयं।।
जो अरिहन्त को द्रव्य-गुण-पर्याय से जानता है, वह आत्मा को जानता है और उसका मोह अवश्य नाश को प्राप्त होता है।
One who knows the Arhat through substance, quality and mode knows the Self, and his delusion surely comes to destruction.
— आराध्य सूत्र · #35
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