Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
पुरुषार्थ

उद्यमेन हि सिद्धयन्ति, कार्याणि न मनोरथै:। न हि सुप्तस्य सिंहस्य, प्रविशन्ति मुखे मृगा:।।

पुरुषार्थ से ही कार्य सिद्ध होते हैं सङ्कल्प करने मात्र से नहीं, जिस प्रकार सोये हुए सिंह के मुख में मृग अपने आप प्रवेश नहीं कर जाते हैं किन्तु सिंह को पुरुषार्थ करना पड़ता है।

Tasks are accomplished only through effort, not by mere resolve — just as deer do not walk of their own accord into the mouth of a sleeping lion; the lion too must exert itself.

— आराध्य सूत्र · #2

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