Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
धर्म

यस्य पुण्यं च पापं च, निष्फलं गलति स्वयं। स योगी तस्य निर्वाणम्, न तस्य पुनरागम:।।

जिसके पुण्य और पाप दोनों की निर्जरा होती है पुन: आस्रव नहीं होता है उस योगी को निर्वाण प्राप्त होता है एवं वहाँ से पुन: संसार में आगमन नहीं होता है, इसके पहले पुण्य की नहीं पाप की निर्जरा होती है।

He whose merit and sin both fall away fruitlessly, with no fresh influx — that yogi attains nirvana and never returns to the world again; and before that, it is not merit but sin that is shed first.

— आराध्य सूत्र · #6

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