स हि गमन बिहारी कल्मषध्वंसकारी, दशशतकरधारी ज्योतिषां मध्यचारी। विधुरपि विधियोगात् ग्रष्यते राहुणासौ, लिखितमपि ललाटे प्रोज्झतुं क: समर्थ:।।
चन्द्रमा आकाश में विहार करता है, अन्धकार को दूर करता है, हजारों किरणों का धारक है, ज्योतिर्विमानों के मध्य में चलने वाला चन्द्रमा भी भाग्य के योग से राहु द्वारा ग्रस लिया जाता है, क्योंकि हो ललाट पर लिखी हुयी रेखा मिटाने में कौन समर्थ है। कौन टाल सकता है?
The moon roams the sky, dispels darkness, bears thousands of rays and moves among the luminous heavens; yet even the moon, by force of destiny, is seized by Rahu — for who is able to erase the line written on the forehead? Who can avert it?
— आराध्य सूत्र · #7
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