Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

को स्वामी मम मित्र को, कहा देश में रीत। खरच किता आमद किती, सदा चिन्तवों मीत।।

Who is my master, who my friend, what are the customs of the land, how much is my expense, how much my income — always reflect on these, friend.

— आराध्य सूत्र · #94

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक