अभ्युत्थानमुपागते गृहपतौ, तद्भाषणे नम्रता, तत्पादार्पित दृष्टिरासनविधौ, तस्योपचर्या स्वयं। सुप्ते तत्र शयीत् तत्प्रथमतो, जह्याच्च शय्यामिति, प्राज्ञैः पुत्रि निवेदिताः कुलवधू, सिद्धान्त धर्मा इमे।।
बुद्धिमान जनक ने सीता को कुलवधू के ये धर्म बतलायें कि पति के आने पर खड़े हो जाना, उनके साथ नम्रता से बात करना, उनके बैठ जाने पर चरणों में दृष्टि रखना, उनकी सेवा स्वयं करना, उनके सो जाने पर सोना, उनके उठने से पहले उठ जाना।
The wise Janak told Sita these duties of a noble wife: to rise when the husband arrives, to speak with him humbly, to keep her gaze at his feet when he is seated, to serve him herself, to sleep only after he has slept, and to rise before he wakes.
— आराध्य सूत्र · #2
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