Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

क्यों व्यर्थ रोते हो? तुम्हारा क्या गया जो रोते हो? तुम क्या लाये थे जो तुमने खो दिया? तुमने क्या पैदा किया था जो नाश हो गया? तुम न कुछ लेकर आये थे, जो लिया यहीं से लिया, जो दिया यहीं पर दिया, खाली हाथ आये थे, खाली हाथ जाओगे, जो आज तुम्हारा है, कल किसी और का था, आगे किसी और का होगा, तुम इसे अपना समझकर मग्न हो रहे हो, बस यही प्रसन्नता तुम्हारे दुःख का कारण है।

Why weep in vain? What have you lost that you cry over? What did you bring that you could lose? What did you create that was destroyed? You came with nothing; what you took, you took from here; what you gave, you gave here. Empty-handed you came, empty-handed you will go. What is yours today belonged to another yesterday and will belong to another tomorrow. You revel in calling it your own — and that very delight is the cause of your sorrow.

— आराध्य सूत्र · #59

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति