कर्म ऋण, हत्या और बैर ये संसार के बढ़ाने वाले हैं। Debt, killing, and enmity are what prolong worldly existence. — आराध्य सूत्र · #51 0 – भेजें 🖼️ इमेज सेव करें · Save image card
यह जीव पुण्य से स्वर्ग पाता है, पाप से नरक जाता है और पुण्य-पाप दोनों से ममता छोड़कर जो अपने आत्मा का मनन करता है, वह शिवमहल में वास पाता है। कर्म 0 – भेजें
किसी को किसी भी धार्मिक कार्य से रोकने पर आपने उसे ही नहीं रोका किन्तु अपने पुण्य आस्रव को रोका है एवं अपने पुण्य के द्वार बन्द किए हैं। कर्म 0 – भेजें
जो चीज आपको आपसे दूर ले जा रही हो, वह 'पाप' है और जो चीज आपको आपके पास ला रही हो, वह 'पुण्य' है। कर्म 0 – भेजें
यदि सचमुच ही तुम दुःख से डरते हो और तुम्हें दुःख अप्रिय है, तो फिर प्रकट या गुप्त किसी भी रूप में पाप कर्म मत करो। कर्म 0 – भेजें