Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

वैराग्य के पाँच सूत्र- 1.जीव यम के दाँतों के बीच रहकर भी जीने की इच्छा करता है, 2.संसारी प्राणी मोह उदय के कारण संसार से निकलने का उपाय नहीं करता है, 3.सारा संसार अज्ञान रुपी अन्धकार में जी रहा है, 4.पदार्थों के देखते ही राग या द्वेष रुपी जहर चढ़ता है, 5.पैर रखते ही पाप होना शुरू हो जाता है।

Five maxims of detachment: 1. the soul desires to live even while caught between the teeth of Death, 2. the worldly being, due to delusion, makes no effort to escape worldly existence, 3. the whole world lives in the darkness of ignorance, 4. the moment objects are seen, the poison of attachment or aversion rises, 5. the moment one sets down a foot, sin begins.

— आराध्य सूत्र · #74

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति