Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

राजा का नाश खोटी मन्त्रणा से, मुनि का नाश परिग्रह से, कुल का नाश कुपुत्र से, लज्जा का नाश शराब से, स्नेह का नाश प्रवास से, समृद्धि का नाश अन्याय से, बालक का नाश लाड़-प्यार से, व्रतों का नाश अध्ययन नहीं करने से, ब्रह्मचर्य का नाश कुसङ्गति से, खेती का नाश देख-रेख न करने से, मैत्री का नाश स्नेह नहीं करने से, एवं धन का नाश आलस से हो जाता है।

A king is ruined by bad counsel, a monk by possessions, a family by a wicked son, modesty by liquor, affection by long absence, prosperity by injustice, a child by pampering, vows by neglect of study, celibacy by bad company, farming by lack of care, friendship by lack of affection, and wealth by idleness.

— आराध्य सूत्र · #14

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
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