व्यक्ति के पास नब्बे रुपये हैं, तो दस रुपये का आभाव खटकता है, सौ रुपये के चक्कर में रहता है, नब्बे रुपये का सुख नहीं भोग पाता है।
If a person has ninety rupees, the lack of ten rupees pricks him; caught in chasing the hundred, he cannot enjoy the happiness of the ninety he has.
— आराध्य सूत्र · #67
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