Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

लालसा और इच्छाओं पर नियन्त्रण- भौतिक इच्छाओं और इन्द्रिय सुखों से प्राप्त तृप्ति अस्थायी और पीड़ा से युक्त होती है, हम इन क्षणिक सुखों से अधिक ऊँची किस्म की प्रसन्नता के अधिकारी हैं, जो स्थायी और सन्तोष जनक है, आवश्यकताएँ और आराम देने वाली मूल वस्तुएं जीवन को बनाए रखने के लिए जरूरी हैं तथा प्रकृति से प्राप्त होने वाला सुख सात्विक है, जबकि इच्छाओं में तामसिक व राजसिक सुख गर्भित है अपने विकास और जीवन के सत्यों को जानने की इच्छाएं अच्छी इच्छाएं हैं।

Control over craving and desires - the satisfaction gained from material desires and sensory pleasures is temporary and mixed with pain. We deserve a higher kind of happiness than these fleeting pleasures - one that is lasting and contenting. Needs and basic comforts are required to sustain life, and the joy drawn from nature is sattvic, whereas within desires lie tamasic and rajasic pleasures. Desires to know one's own growth and the truths of life are good desires.

— आराध्य सूत्र · #95

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति