Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

संसार द्वन्द्वात्मक है- सुख-दुःख, शत्रु-मित्र, रात-दिन, सर्दी-गर्मी दोनों आते हैं अतः समता रखना चाहिए यदि आप अपमान नहीं चाहते तो आपको प्रशंसा पाने की इच्छा भी छोड़ना चाहिए।

The world is a play of opposites: happiness and sorrow, foe and friend, night and day, cold and heat — both come; so one should keep equanimity. If you do not want humiliation, you must also give up the desire for praise.

— आराध्य सूत्र · #86

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति