Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

अर्थनाशं, मनस्तापं, गृहे दुश्चरितानि च। वञ्चनं चापमानं च, मतिमान न प्रकाशयेत्।।

धन का नाश, मानसिक सन्ताप, घर के दुश्चरित्र, स्वयं का ठगा जाना एवं स्वयं के अपमान को बुद्धिमान प्रकाशित न करें।

Loss of wealth, mental anguish, misconduct within the home, being cheated, and one's own humiliation — the wise should not reveal these to others.

— आराध्य सूत्र · कण्ठाभरण श्लोक · #24

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक