स्त्रीषु राजकुले सर्पे, सदृशे शत्रु विग्रहे। आयुधाग्रे न कर्त्तव्यो, विश्वासश्च कदाचन।। नदीनां शस्त्रपाणिनां, नखिनां शृङ्गिणां तथा। विश्वासो नैव कर्त्तव्यः, स्त्रीषु राजकुलेषु च।।
स्त्रियों का, राजाओं का, युद्ध में समानता रखने वाले शत्रु का, शस्त्र वाले का, नदी का, नाखून और दाँत वाले का तथा सींग वाले का कभी विश्वास नहीं करना चाहिये।
One should never place trust in women, in kings, in an enemy of equal strength in battle, in the armed, in rivers, in creatures with claws and teeth, and in the horned.
— आराध्य सूत्र · कण्ठाभरण श्लोक · #22
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