सत्यं वदात्र यदि जन्मनिबन्धुकृत्य, माप्तं त्वया किमपि बन्धुजनाद्धितार्थम्। एतावदेव परमस्ति मृतस्य पश्चात्, सम्भूयकायमहितं तव भस्मयन्ति।।
आचार्य भगवन् पूँछते हैं हे भव्य! सच-सच बताओ कि तूने इस संसार में बन्धुजनों के द्वारा आत्म हितकारी कुछ प्राप्त किया है अर्थात् नहीं? किन्तु इतना अवश्य है कि मरने के पश्चात तुम्हारे इस अहितकारी शरीर को ये सब मिल करके भस्म कर देते हैं।
The revered Acharya asks: O noble soul, tell truly — have you gained anything for the soul's good in this world through your kinsmen? Surely not. This much is certain: after death, all these very kinsmen join together and reduce this harmful body of yours to ashes.
— आराध्य सूत्र · आत्मानुशासन-83 · #19
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