Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

एक महिला सिनेमा के पर्दे पर आन्धी-तूफान-वर्षा देख कर सोचने लगी, मेरे छत पर कपड़े सूख रहे हैं वे उड़ जायेंगे और भींग जायेंगे, उन्हे चलकर उठा लूँ, वह सिनेमा घर से उठकर शीघ्रता से घर की ओर चल पड़ी, शीघ्रता के कारण एक मोटर से टकराई और मरगई, उसी प्रकार संसारी प्राणी नकली को असली समझ कर भ्रम बुद्धि से दु:खी होते हैं।

A woman, seeing a storm, gale and rain on a cinema screen, began to think, 'My clothes are drying on the roof; they will blow away and get soaked — let me go take them in.' She rushed out of the cinema hall toward home, and in her haste was struck by a car and killed. In the same way, worldly beings, mistaking the false for the real, suffer through deluded understanding.

— आराध्य सूत्र · #139

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक