Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

मोहेन सवृतं ज्ञानं, स्वभावं लभते न हि। मत्त:पुँमान् पदार्थानां यथा मदनकोद्रवै:।।

मद को चढ़ाने वाले कोदों को खाकर, मत्त हुये पुरुष की तरह, मोह से ढका ज्ञान स्वभाव को प्राप्त नहीं होता है, ज्ञान का सागर मोह की ओट में दिखाई नहीं देता है।

Like a man intoxicated by eating fermented kodo grain, knowledge veiled by delusion does not attain its true nature; the ocean of knowledge stays hidden behind delusion's screen.

— आराध्य सूत्र · #48

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति