Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
पुरुषार्थ

सुखार्थिन: कुतो विद्या, विद्यार्थिन: कुत: सुखं। सुखार्थी वा त्यजेत् विद्यां, विद्यार्थी वा त्यजेत् सुखं।।

सुखिया स्वभावी को विद्या कहाँ से मिल सकती है और विद्यार्थी को सुख कहाँ से मिल सकता है, सुखिया स्वभावी विद्या को छोड़ देता है और विद्यार्थी सुख छोड़ देता है।

How can the comfort-seeker gain knowledge, and how can the knowledge-seeker gain comfort? The comfort-lover abandons study, and the true student abandons comfort.

— आराध्य सूत्र · #40

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