Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
ज्ञान

मातेव रक्षति पितेव हिते नियुङ्क्ते, कान्तेव चाभिरमयत्यपनीय खेदं। लक्ष्मीं तनोति वितनोति च दिक्षु कीर्तिं, किं किं न साधयति कल्पलतेव विद्या।।

विद्या माता की तरह रक्षा करती है, पिता की तरह हित में लगाती है, स्त्री की तरह खेद को दूर करके रमाती है, लक्ष्मी को बढ़ाती है, दिशाओं में कीर्ति का विस्तार करती है और कल्पवृक्ष की तरह क्या-क्या सिद्ध नहीं करती है?

Knowledge protects like a mother, engages one in good like a father, removes weariness and delights like a spouse, increases fortune, spreads fame in all directions — like a wish-fulfilling vine, what does it not accomplish?

— आराध्य सूत्र · #39

इसी विषय के और सूत्र

सभी ज्ञान →