Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

चारित्र तथा दान करने वाले सम्यग्दृष्टि जीव मुक्ति की इच्छा करते हैं अन्य सुख की नहीं जिस प्रकार गृहस्थ बीज बोता है तो उससे बहुत फल की इच्छा करता है तृणादिक की नहीं। ''इन्द्र, चक्रवर्ती पद विनश्वर है।''

Right-viewed beings who practice conduct and charity desire liberation, not other pleasures - just as a householder sowing seed desires much fruit, not mere straw. 'The ranks of Indra and Chakravarti are perishable.'

— आराध्य सूत्र · #6224

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति