Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

जिसे आगे स्वप्नवत् मालूम करना पड़ेगा उसे वर्तमान में स्वप्नवत् समझो तो महती शान्ति प्राप्त होगी, इष्ट समागम में हर्षभाव की तपस्या करने वालों के अनिष्ट समागम में विषादाभाव की तपस्या करना सरल है।

What will later be known to be dreamlike - understand it as dreamlike now, and great peace will be attained; for those who practice restraint of joy in pleasant unions, restraint of grief in unpleasant unions is easy.

— आराध्य सूत्र · #6163

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति