अपने पास कुछ भी न रखना यही व्रती का नियम है एक वस्तु को भी अपने पास रखना मानो उन बन्धनों में फिर आ फँसना है जिन्हें मनुष्य एक बार छोड़ चुका है।
To keep nothing for oneself is the ascetic's rule; to keep even one thing is like falling back into the bonds a person has once left.
— आराध्य सूत्र · #6130
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