Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

जितने अपरिचित रहोगे, उतने सुखी रहोगे। जब शादी नहीं हुई थी, तब मात्र आपको अपने घर का कष्ट समझ में आता था, शादी के बाद अब दस जगह के दुःखों में सम्मिलित होना पड़ता है। विषयों की मिठास में जिनमुद्रा धारण नहीं कर पाये, एक क्षण के सुख के पीछे भव-भव की शान्ति चली गयी।

The fewer your entanglements, the happier you remain. Before marriage you knew only your own home's troubles; after it you must share the sorrows of ten households. Lost in the sweetness of the senses, one who never took up the ascetic's path traded the peace of countless lives for a moment's pleasure.

— आराध्य सूत्र · #5668

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति