Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

बुद्धि का फल तत्त्व विचार, शरीर का फल व्रत धारण, धन का फल पात्र दान और वाणी का फल मनुष्यों में प्रीति उत्पन्न करना है।

The fruit of intellect is contemplation of truth, the fruit of the body is keeping vows, the fruit of wealth is worthy charity, and the fruit of speech is creating affection among people.

— आराध्य सूत्र · #5225

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक