Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

जिन–जिन वस्तुओं को हम अपनी मानते हैं, उन–उन वस्तुओं के हम पराधीन हो जाते हैं, पराधीन व्यक्ति को स्वप्न में भी सुख नहीं मिलता है–''पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं।''

Whatever things we take to be ours, to those very things we become enslaved; a dependent person finds no happiness even in dreams—"The dependent find no happiness even in dreams."

— आराध्य सूत्र · #4504

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति