Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

जिस पद्धति में अब तक रहते आए उस पद्धति में शान्त तो हो नहीं सके, फिर इन संस्कारों को छोड़ो अलौकिक वृत्ति धारण करो, दुनिया से अपरिचित रहो, अकेलापन अनुभव करने वाला शान्त और सुखी रहता है।

In the way you have lived until now you could find no peace; so give up these old conditionings, adopt a transcendent disposition, stay unacquainted with the world — for one who experiences aloneness remains calm and happy.

— आराध्य सूत्र · #3978

इसी विषय के और सूत्र

सभी अनासक्ति →
किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति