Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

जिसकी लाखों मूर्ख प्रशंसा करें और दूसरी ओर एक सदाचारी धर्मात्मा का ज्ञान उसके आचार को दूषित समझें तो तत्त्वज्ञानी धर्मात्मा की सम्मति ही ठीक है।

If millions of fools praise a conduct while one virtuous, righteous knower deems it flawed, then the opinion of the wise, righteous soul alone is correct.

— आराध्य सूत्र · #3308

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक