Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

इस पर बार-बार चिन्तन करना चाहिए कि कौन-सा समय है? कौन-कौन मित्र है? कौन-सा देश है? आय कितनी और व्यय कितना है? मैं कौन हूँ और मेरी आत्मा में कितनी शक्तियाँ हैं?

One should reflect again and again: What time is this? Who are my friends? Which is this land? What is my income and expense? Who am I, and how much power lies within my soul?

— आराध्य सूत्र · #3204

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक