Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

प्रत्येक मनुष्य प्रवृत्ति से निवृत्ति की ओर अग्रसर होता है जैसे राग के बाद विराग, लोभ के बाद शौच, संग्रह के बाद त्याग, काम के बाद निष्काम, श्रम के बाद विश्राम, भोग के बाद योग।

Every person moves from engagement toward renunciation: after attachment comes detachment, after greed purity, after hoarding giving, after desire desirelessness, after toil rest, and after indulgence yoga.

— आराध्य सूत्र · #2836

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति