Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

यदि नदी में नहाते हो तो सैंकड़ों टन पानी सिर पर होने पर भी वजन मालूम नहीं होता किन्तु जब उस पानी को घड़े में भरकर सिर पर रखते हो तो पानी भार लगता है, कारण पानी को अपना मान लिया, ठीक उसी प्रकार संसार में, परिवार में, पदार्थों में रहना परिग्रह नहीं है किन्तु उन्हें अपना मानना परिग्रह है।

When you bathe in a river, though hundreds of tons of water are above you, you feel no weight; but when you fill a pot and place it on your head, the water feels heavy — because you have claimed it as your own. Likewise, to live amid the world, family, and objects is not possessiveness; to regard them as 'mine' is possessiveness.

— आराध्य सूत्र · #2606

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति