Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
संतोष

जिस प्रकार काठ अपने ही अंदर से प्रकट हुई अग्नि द्वारा भस्म होकर खत्म हो जाता है, उसी प्रकार मनुष्य अपने ही भीतर रहने वाली तृष्णा से नाश को प्राप्त होता है।

Just as wood is reduced to ash and consumed by the fire arising within itself, so a man is brought to ruin by the craving dwelling within him.

— आराध्य सूत्र · #2548

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