Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

रागी जीव ने शरीर के राग में न जाने कितनों को शरीर रहित कर दिया, एक पर्याय को सजाने में कितनों की पर्यायों को नष्ट कर दिया। सही चेहरा तो चारित्र से चमकता है किन्तु आपने परजीवों की हिंसक सामग्री से चमकाना चाहा है। चर्म सुन्दर नहीं सुन्दर तो आत्मा का धर्म है।

The attached soul, in its love for the body, has deprived countless beings of their bodies; in adorning one form it has destroyed the forms of many. The true face shines with character, yet you have sought to make it shine with materials of violence taken from other beings. Skin is not beautiful; what is beautiful is the dharma of the soul.

— आराध्य सूत्र · #1777

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति