Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

सबसे कठिन बंधन स्नेह का है, परतन्त्रता भी मात्र इतनी है कि पर से स्नेह है, अपने को स्वतन्त्र, स्वतः सिद्ध, अविनाशी, अखण्ड, सत् जानकर बन्धन से दूर रहो और प्रसन्न रहो।

The hardest bondage is that of affection; all our dependence is just this — that we feel affection for the not-self. Knowing yourself to be free, self-established, imperishable, whole, and real, stay away from bondage and remain joyful.

— आराध्य सूत्र · #1593

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति