Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

विवेकी पुरुष को अपने मन में यह विचार करना चाहिए कि मैं कहाँ हूँ, कहाँ जाऊँगा? मैं कौन हूँ? यहाँ क्यों आया हूँ? और किसलिए? किसका शोक करूँ?

A discerning person should reflect in the mind: Where am I, where will I go? Who am I? Why have I come here? And for what? Over whom should I grieve?

— आराध्य सूत्र · #1249

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक