Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

स्वभाव, रुचि, अभ्यास, संगति, सम्प्रदाय और विवेक बुद्धि ये न्यूनाधिक विकास के कारण हैं क्योंकि सबको ये सब चीजें एक सी हृदयंगम नहीं होती हैं।

Temperament, taste, practice, company, sect and discerning intellect account for the differing degrees of growth, for these things are not grasped identically by everyone.

— आराध्य सूत्र · #958

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक