Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

भोग में रोग का भय है, कुल आचार में भ्रष्टता का भय है, धन में राजा का भय है, अभिमान में दीनता का भय है, सामर्थ्य में शत्रु का भय है, सौन्दर्य में वृद्धावस्था का भय है, शास्त्रज्ञान में तर्कशील विवादी का भय है, गुण में दुष्ट का भय है और शरीर में मौत का भय है, इस संसार में सभी वस्तुएँ भययुक्त हैं, वैराग्य ही अभय है।

In enjoyment there is fear of disease, in family conduct fear of corruption, in wealth fear of the king, in pride fear of humiliation, in power fear of the enemy, in beauty fear of old age, in scriptural learning fear of the argumentative disputant, in virtue fear of the wicked, and in the body fear of death—in this world all things are full of fear; only detachment is fearless.

— आराध्य सूत्र · #841

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति