Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
कर्म

जीवन का निर्वाह पिता या गुरु के नाम पर नहीं होता, स्वयं के पुण्य-पाप से होता है, कोई किसी को सुखी-दुःखी नहीं करता, अपितु स्वयं का पुण्य-पाप सुखी-दुःखी करता है।

Life is sustained not on the name of one's father or teacher but by one's own merit and sin; no one makes another happy or unhappy—rather, one's own merit and sin make one happy or unhappy.

— आराध्य सूत्र · #792

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