Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
विवेक

पर्याय को दोष मत दो अपने परिणामों को दोष दो, पर्याय तो मटके के समान है उसमें अमृत भरो या जहर विवेक आपका है।

Do not blame the circumstance; blame your own dispositions. A circumstance is like an earthen pot—whether you fill it with nectar or poison is your own discernment.

— आराध्य सूत्र · #623

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प्रकृति ने सूर्योदय, सूर्यास्त, गर्मी, बरसात, ठंड सब का समय निश्चित कर रखा है केवल मनुष्य को ही हर बात की छूट दे रखी है, कब सोना, कब जागना, क्या करना सब कुछ स्वयं मनुष्य के हाथ में है वह सब कुछ करने में स्वतंत्र है।
विवेक