Jain Quotes

जैन जीवन-पद्धति सूत्र
अनासक्ति

रागद्वेष मोह का निमित्त, आश्रय, आधार और विषय पर पदार्थ हैं। यदि किसी से कहा जाये कि तुम रागद्वेष मोह करो किन्तु शुद्धात्मा के सिवाय अन्य पदार्थ में मत करो तो वह कर ही कैसे सकता है।

The occasion, support, basis and object of attachment, aversion and delusion are external substances. If someone were told, 'Have attachment, aversion and delusion, but toward nothing except the pure soul,' how could he do it at all?

— आराध्य सूत्र · #450

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किसी वस्तु के संयोग के लिए शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि संयोग में शान्ति और स्वाधीनता नहीं है किसी वस्तु के वियोग में शोक करना इसलिए व्यर्थ है क्योंकि पर की रक्षा अपने अधीन नहीं है व पर का अपने से तादात्म्य नहीं है तथा वियोग में अपने स्वरूप की हानि भी नहीं है।
अनासक्ति
धर्म कथा सुनते समय, श्मशान में शवदाह की ज्वाला देखते समय और रोग से सन्तप्त रोगी के कष्ट का अनुभव करते समय मानव हृदय में जो संसार से विरक्त होने की बुद्धि पैदा होती है, यदि वह मनोदशा मस्तिष्क में क्षणिक न रहे स्थिर हो जाये तो मनुष्य संसारी मायाजाल से शीघ्र ही मुक्ति पा लेता है।
अनासक्ति